राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान

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राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान  क्षेत्रीय ईकाई: चैन्नई (तमिलनाडु)

तमिलनाडु के कुल मलेरिया मामलों का 53.6 प्रतिशत से 78.6 प्रतिशत तक चैन्नई शहर में रिपोर्ट किया गया। प्लाज्मोडियम वायवैक्स प्रमुख मलेरिया परजीवी है जो 93 से 96.3 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। शहरी वातावरण में मलेरिया के संचारण की गत्यात्मकता को समझने के लिए, 1986 में क्षेत्रीय  काखोली ग। इस क्षेत्रीय का का मुख्य उद्देश्य चैन्नई को एक आदर्श प्रतिमान मानते हुए शहरी मलेरिया के नियंत्रण हेतु पर्यावरण हितैषी, लागत प्रभावी एवं दीर्घकालीन मध्यस्थ प्रौद्योगिकी का विकास करना था। प्रारंभ से ही, इस क्षेत्रीय ईकाई द्वारा अनेक विज्ञानीय/अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य किया गया है। चैन्नई में मलेरिया के जैव-पर्यावरणीय नियंत्रण एवं सफल क्षेत्रीय प्रदर्शन पर आधारित ‘मलेरिया नियंत्रण हेतु सात बिन्दु कार्य योजना’ का मसौदा तैयार किया गया और वर्ष 1992 में तमिलनाडु सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया; चैन्नई के दो प्रमुख जल मार्गों में जैव-डिंभकनाशियों का बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय मूल्यांकन किया गया, जिसे बाद में तमिलनाडु में मच्छर नियंत्रण हेतु शामिल किया गया; दिंदिगुल नगरपालिका में मलेरिया नियंत्रण करने हेतु मलेरिया जनित स्तरीकरण किया गया और इसके परिणामस्वरूप मलेरिया सर्वेक्षण प्रणाली पर आधारित जी.आ.एस. का विकास हुआ। शहरी मलेरिया रोगवाहक के पारिस्थितिकीय परिवर्तियों की जीव पारिस्थितिकी; चैन्नई में एनॉफिलीज स्टीफेंसी, वर्षा जल संग्रहण (आरडब्ल्युएच) एवं चैन्न में मच्छर/रोगवाहक प्रजनन को कम करने की पद्धतियां आदि प्रमुख प्रोजैक्ट क्षेत्रीय का द्वारा किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय का ने अनेक नए डिंभकनाशियों एवं वयस्क नाशको के सूत्रीकरण, विकर्षकों एवं नैदानिक किटों का मूल्यांकन किया है जो कि राष्ट्रीय कार्यक्रम में अनुवादित किए जा चुके हैं। क्षेत्रीय का द्वारा एक पुनतिअस शरमानामक न डिंभकनाशी मछली की चैन्न(1992) में पहचान की है, रामेश्वरम महाद्वीप (1992) में एनॉफिलीज क्युलिसिफेसिज काम्पलेक्स (प्रजाति ) की न सहोदर प्रजातियों का भी पता लगाया गया और इसके साथ ही चैन्नई में (2007) देशी डिंभकनाशी मछलियों, एपलोचियलस पारवस एवं ए ब्लॉकी की वर्गिकी संदिग्धता की पुष्टि की। क्षेत्रीय का की सभी अनुसंधान खोजों का उद्देश्य स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकारियों को आवश्यक विज्ञानीय परिणाम प्रदान करते हुए मध्यस्य प्रचालनों को मजबूत बनाया जाना है।  क्षेत्रीय का द्वारा चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी के स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा छात्रों, कला एवं विज्ञान महाविद्यालयों के अतिरिक्त मेडीकल महाविद्यालयों के स्नातकों एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके राज्य/राष्ट्रीय कार्यक्रम को तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाता है। कीटविज्ञानीय निरीक्षण के क्षेत्रीय प्रदर्शन भी कीटविज्ञानियों एवं क्षेत्रीय स्टाफ के लिए किए जाते हैं। क्षेत्रीय काद्वारा तमिलनाडु, ओडिशा एवं केरल में मलेरिया का स्थिति विश्लेषण एवं प्रकोप अन्वेषण भी किया गया। डेंगू व चिकनगुनिया प्रकोप अन्वेषण भी केरल एवं तमिलनाडु में किया गया है। इंजीनियरों एवं राज्य व केन्द्र सरकार के जन स्वास्थ्य अधिकारियों हेतु मलेरिया नियंत्रण के लिए अंतएकक समन्वयन के लिए अनेक कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाता है।  चैन्न के कॉरपारेशन, जन स्वास्थ्य और निवारणात्मक औषध निदेशालय, तमिलनाडु सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय, भारत सरकार के निकट समन्वय से अनुसंधानिक गतिविधियां आयोजित की जाती है।

अनुसंधान स्टाफ

1. डॉ. एलेक्स एप्पन, वैज्ञानिक ‘डी’ एवं प्रभारी

2. डॉ. के.जोन रविन्द्रन, आर.ओ./वैज्ञानिक ‘बी’

3. श्री एन. भास्कर, तकनीकी सहायक

4. श्रीमती बी. रीटा, तकनीकी सहायक

चालू अनुसंधान परियोजनाएं

1.  भारत में जटिल मलेरिया के अध्ययन हेतु केंद्र-एनआईएच प्रोजेक्ट (एनआईएमआर/पीबी/ 2010-16 150):सह-अन्वेषक।-

2- केरल, भारत  में सबजीनस स्टीगोमिया की एलबोपिक्टस उप-समूह प्रजातियों के विशेष संदर्भ में एडिज एलबोपिक्टस एवं एडिज एजिप्टी की पारिस्थितिकी एवं वितरण(एनआईएमआर/आईडीवीसी/ 2011/128):मुख्य-अन्वेषक ।

3- तमिलनाडु, भारत के महामारीविद क्षेत्रों में प्लाज्मोडियम वायवैक्स एवं प्लाज्मोडियम फाल्सीपैरम मलेरिया के प्रति मलेरिया रोधी प्रतिरोधकता का अनुवीक्षण(एनआईएमआर/आईडीवीसी/ 2013/224):मुख्य-अन्वेषक ।

4- तमिलनाडु में भौगोलिक वैभिन्य पारिस्थितिक प्रारूपों से एनॉफिलीज स्टीफैंसी की संवेदनशीलता का प्लाज्मोडियम प्रजातियों से तुलनात्मक अध्ययन(एनआईएमआर/आईडीवीसी/ 2013/224):मुख्य-अन्वेषक ।

5- चैन्नई(थिरयुवोतिरीयुर), तमिलनाडु, भारत के महामारीविद क्षेत्रों में मलेरिया का गतिविज्ञान (एनआईएमआर/आईडीवीसी/ 2014/253):मुख्य-अन्वेषक ।

6- रामेश्वरम महाद्वीप, तमिलनाडु में मलेरिया मामलों में कमी लाने हेतु कार्यक्रम के मौजूदा उपायों पद्धतियों का अनुवीक्षण(एनआईएमआर/आईडीवीसी/ 2014/253):मुख्य-अन्वेषक ।

7- चैन्नई, भारत में रोगवाहक घनत्व में सूक्ष्म जलवायु परिवर्तन एवं इसके प्रभाव व इसके परिणामस्वरुप मलेरिया संचारण:मुख्य-अन्वेषक ।

8- चैन्नई, भारत में पात्र निवास स्थलों में पनपते एडीज एजिप्टी के नियंत्रण हेतु मच्छर डिंभकनाशी के रुप में सुमिलार्वे 2 एमआर का मूल्यांकन-हुप्स प्रौजेक्ट: मुख्य अन्वेषक।

 

जानकारी हेतु संपर्क करें:

 

प्रभारी अधिकारी

राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान

एनआईई कैम्पस, दूसरी मैन रोड,

टीएनएचबी, आयापकक्म

चैन्नई-600 077

भारत,

दूरभाष : +91-44—2682000(डायरेक्ट-कार्यालय), 91-44-26821700

मोबाईल:- +919444253592

 

 

 

 

 

 

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