राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान

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एन.आई.एम.आर. क्षेत्रीय ईकाई: राउरकेला (ओडिशा)

सन् 1988 में सुन्दरगढ़ जिला (ओडिशा) में राउरकेला क्षेत्रीय का की स्थापना निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए की ग :

क) मलेरिया पर अनुप्रयुक्त क्षेत्रीय अनुसंधान करना।

ख) उचित रोग रोगवाहक नियंत्रण पद्धतियों का विकास एवं प्रदर्शन।

ग) मलेरिया के सामाजिक आर्थिक पहलुओं विशेषत: विकसित उपायों की व्यवहार्यता के संदर्भ में अध्ययन और

घ) उपयोगकर्ताओं को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा।

राउरकेला, ओडिशा राज्य के सुन्दरगढ़ जिले का एक औद्योगिक शहर है और पूर्वी पठार के गरहजट पहाड़ियों में समुद्रतल से 200 मीटर की ऊंचार्इ पर, 200-12 डिग्री उत्तर, 840-53 डिग्री पूर्व के बीच स्थित है। यह शहर दक्षिण-पूर्वी रेलवे के हावड़ा-मुम्ब रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण रेल द्वारा भलि-भांति जुड़ा हुआ है।

मानचित्र में यह क्षेत्र लहरदार घाटियों में वन, पहाड़ियों, चट्टानी झरनों, नदियों, जल-स्रोतों और घाटी में धान के खेतों से भरा हुआ है। उष्णकटिबंधीय जलवायु इस क्षेत्र की विशेषता है और यहां दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितम्बर) के दौरान और वापसी में उत्तरपूर्वी मानसून (दिसम्बर-जनवरी) के मध्य अत्यधिक वर्षा होती है। यहां पर सालाना औसत वर्षा 160-200 से.मी. के बीच में होती है। यहां पर तापमान गर्मियों में अधिकतम 440 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 110 डिग्री सेल्सियस और सर्दियों में 14.30 डिग्री सेल्सियस और 39.20 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है। इस जिले का 36 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र अर्द्ध-सदाबहार या उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन से घिरा है| ग्रामीण आबादी का लगभग 62 प्रतिशत भाग आदिवासी आबादी है जो 40 भिन्न-भिन्न आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करती है।

स्थानीय मलेरिया समस्या :

ओडिशा राज्य में, मलेरिया एक प्रमुख जन-स्वास्थ्य समस्या है, जो देश में मलेरिया के सबसे अधिक मामले (22 प्रतिशत ), पी. फाल्सीपैरम  के 43 प्रतिशत मामलों और मलेरिया से होने वाली मृत्यु के रिपोर्ट किए गए 50 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। यद्यपि, यह भारत की कुल जनसंख्या का केवल 4 प्रतिशत है। सुन्दरगढ़ जिले की तरह ही राज्य के आदिवासी क्षेत्र अत्यधिक गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्र हैं जहां मलेरिया मध्य से अति महामारी रूप से मौजूद है। ;gkaa पी. फाल्सीपैरम  मलेरिया का प्रमुख कारण है और राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में 80-90 प्रतिशत मलेरिया के मामलों के लिए जिम्मेदार है और जो कि कुछ पारिस्थितिकीय विशेषताएं लिए हुए है जैसे पहाड़ी इलाका, वन सीमांत एवं वन क्षेत्र और तरार्इ क्षेत्र जहां सभी मलेरियाजनित कारक अपनी अधिकतम प्रभावकता से कार्य करते हैं।  स्पष्ट रुप से, मलेरिया इस क्षेत्र की प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है और मुख्यत: रूग्णता और मर्त्यता के लिए जिम्मेदार है।

मलेरिया रोगवाहक:

पूरा ओडिशा राज्य, दो प्राथमिक रोगवाहक प्रजातियों के प्रभाव में है, पहली एनॉ. क्युलिसिफेसीज, दूसरी एना. फ्ल्युवायटिलिस । सन् 1940 के दशक में रिकार्ड किया गया एनॉ संन्डायकस  जो कर्इ बार तटीय क्षेत्रों में महामारी फैलाने के लिए जिम्मेदार है, अब लुप्त प्राय: हो चुका हैं। दो रोग वाहक प्रजातियों में से एनॉ. क्युलिसिफेसीज मैदानी और तटीय क्षेत्रों में जहां मलेरिया मौसम के अनुसार होता है व कम होता है , व्यापक रूप से प्रचलित है। जबकि एनॉ. फ्लुवियातिलिस  राज्य के पहाड़ी जंगलों या पहाड़ी क्षेत्र तक ही सीमित है और इस प्रजाति के उच्च प्रजातिता लक्षणों के कारण अत्यधिक संचरण के लिए जिम्मेदार है।

 

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